12/09/2018:-“🍃🌸Locha-E-Ulfat🌸🍃”

हाँ… जगजाहिर ये जाहिल से ख्वाब मेरे ।
एक तू हि ना समझे तो बेकार है ये घनेरे ।।

अन्धेरों में सूरज की किरणों की तरंगे हो तुम ।
दिल नहीं मानता कि अंजान हो तुम ।।

प्यारा सा रिश्‍ता है मेरा तुम्हारा ।
नाम नहीं तो अनाम क्यों ।।

जुबां को दे दो अपनी कोई और काम ।
नज़रों से ही हो जाती हैं गल हज़ार ।।

ख़ूबसूरत तसव्वुर की वो ख़ुशी ।
बेइन्तेहा अकीदतमंद बन गय हम पल उसी ।।

अकीदतों का तुम आयना कभी न तोड़ना ।
मेरा कागज़ी सा दिल है तुम कभी ना तोड़ना ।।

रूठना भले ही…खफा भी हो जाना हमसे।
पर कभी मुहँ तुम न मोड़ना ।।

क्यों सोचें की कल संग है या नहीं ।
आज हैं हम संग तो रंग ही रंग है ।।

तराना कोई गुनगुनाता है दिल।
हरपल ख्वाब तेरे दिखाता है दिल ।।

दुनि‍या की रियायतों को मैं क्या जानू।
संग तू है तो दुनिया को मैं ना पहचाँनू।।

बस एक तू है…और दूजी हूँ मैं ।
सागर तू है …और प्यासी हूँ मैं ।।

साथ है तेरा जैसे ,जिंदगी का गुलज़ार हो जाना ।
मेरे न होना तो किसी और के न हो जाना ।।

खुशियाँ हैं हज़ार अगर तू शामिल है।
जहन्नुम लगता है जहाँन अगर तू न राज़ी है।।

बस रहना मेरे संग, इतना ही कहना काफ़ी है।
अब इतना कुछ कह दिया , अब क्या और बाकि है।।

Published by Keerti Priyadarshini

A person's wisdom yields Patience; it is to one's Glory to overlook an offense.

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